4% Reservation for Persons with Disabilities सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजन (Persons with Benchmark Disabilities – PwBD) के लिए निर्धारित 4% आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संसदीय समिति ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत मिलने वाला आरक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक पात्र उम्मीदवार को उसका वास्तविक लाभ मिले।
समिति ने यह भी जानना चाहा है कि किन विभागों में आरक्षण का पालन किया गया है, कहां रिक्तियां लंबित हैं और किन कारणों से दिव्यांगों के लिए आरक्षित पद अभी तक नहीं भरे गए हैं। यह कदम लाखों दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से सरकारी नौकरियों में समान अवसर की मांग कर रहे हैं।
क्या है 4% दिव्यांग आरक्षण?
Rights of Persons with Disabilities (RPwD) Act, 2016 के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन आने वाली सरकारी नौकरियों में कम से कम 4% पद दिव्यांगजन के लिए आरक्षित किए जाते हैं।
इससे पहले यह आरक्षण 3% था, जिसे नए कानून के लागू होने के बाद बढ़ाकर 4% कर दिया गया। इसका उद्देश्य दिव्यांग नागरिकों को रोजगार के समान अवसर प्रदान करना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।
किन दिव्यांग श्रेणियों को मिलता है आरक्षण?
4% आरक्षण विभिन्न प्रकार की बेंचमार्क दिव्यांगताओं के बीच विभाजित किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले व्यक्ति
- श्रवण बाधित व्यक्ति
- चलने-फिरने में दिव्यांगता
- सेरेब्रल पाल्सी
- कुष्ठ रोग से मुक्त व्यक्ति
- बौनापन
- एसिड अटैक पीड़ित
- मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
- ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर
- बौद्धिक दिव्यांगता
- मानसिक बीमारी
- मल्टीपल डिसेबिलिटी सहित अन्य पात्र श्रेणियां
इन सभी श्रेणियों के लिए अधिनियम के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार आरक्षण का लाभ दिया जाता है।
संसदीय समिति ने क्या कहा?
संसदीय समिति ने विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों से यह जानकारी मांगी है कि—
- कितने पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं।
- कितने पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।
- कितने पद अभी भी रिक्त हैं।
- आरक्षण लागू करने में क्या कठिनाइयां सामने आईं।
- बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
- भविष्य में आरक्षण का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की क्या योजना है।
समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विभाग में दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों की अनदेखी न हो।
समिति ने रिपोर्ट क्यों मांगी?
हाल के वर्षों में कई संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने यह मुद्दा उठाया कि अनेक सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पद खाली पड़े हैं या फिर भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा।
कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि—
- आरक्षित पदों का सही निर्धारण नहीं किया गया।
- भर्ती विज्ञापनों में दिव्यांग श्रेणियों का उल्लेख नहीं किया गया।
- बैकलॉग पद वर्षों तक खाली रहे।
- चयन प्रक्रिया में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
RPwD Act- 2016 क्या है?
Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया महत्वपूर्ण कानून है।
इस अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- शिक्षा में समान अवसर
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण
- भेदभाव पर रोक
- सार्वजनिक भवनों को सुगम बनाना
- कौशल विकास एवं रोजगार को बढ़ावा देना
- सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना
यह अधिनियम दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन और समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
सरकारी विभागों की क्या जिम्मेदारी है?
केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों को निम्न कार्य सुनिश्चित करने होते हैं—
- आरक्षित पदों की पहचान करना।
- भर्ती प्रक्रिया में 4% आरक्षण लागू करना।
- दिव्यांग अभ्यर्थियों को आवश्यक सुविधा देना।
- चयन प्रक्रिया को सुगम बनाना।
- बैकलॉग रिक्तियों को समय पर भरना।
- वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट तैयार करना।
यदि किसी विभाग द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को क्या लाभ मिलेगा?
4% Reservation for Persons with Disabilities यदि समिति की सिफारिशों के आधार पर सभी विभागों में आरक्षण का सही पालन होता है, तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं—
- सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर मिलेंगे।
- लंबित बैकलॉग पदों पर भर्ती तेज होगी।
- भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
- समान अवसर का अधिकार मजबूत होगा।
- दिव्यांग उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
- रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
बैकलॉग रिक्तियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?
4% Reservation for Persons with Disabilities कई बार किसी भर्ती वर्ष में आरक्षित पद नहीं भर पाते। ऐसे पदों को बैकलॉग वैकेंसी कहा जाता है।
सरकार का दायित्व होता है कि इन पदों को आगामी भर्तियों में प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। यदि बैकलॉग रिक्तियां लंबे समय तक खाली रहती हैं, तो दिव्यांग उम्मीदवारों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पाता।
भर्ती प्रक्रिया में किन सुविधाओं का प्रावधान है?
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया में कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं—
- परीक्षा में अतिरिक्त समय
- स्क्राइब (लेखन सहायक) की सुविधा
- सुगम परीक्षा केंद्र
- आवश्यक तकनीकी सहायता
- श्रेणी अनुसार आयु सीमा में छूट
- आवेदन शुल्क में छूट (जहां लागू हो)
इन सुविधाओं का उद्देश्य दिव्यांग उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करना है।
उम्मीदवारों को क्या करना चाहिए?
4% Reservation for Persons with Disabilities जो उम्मीदवार दिव्यांग आरक्षण के अंतर्गत सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें—
- अपना वैध Benchmark Disability Certificate तैयार रखना चाहिए।
- संबंधित भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना ध्यान से पढ़नी चाहिए।
- पात्रता एवं आरक्षण नियमों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
- समय-समय पर आने वाली सरकारी भर्तियों पर नजर रखनी चाहिए।
- सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखने चाहिए।
Official Website:4% Reservation for Persons with Disabilities
- Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD): https://depwd.gov.in
- Chief Commissioner for Persons with Disabilities (CCPD): https://ccdisabilities.nic.in
निष्कर्ष – 4% Reservation for Persons with Disabilities
सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए 4% आरक्षण केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि समान अवसर और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संसदीय समिति द्वारा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से अनुपालन रिपोर्ट मांगना इस बात का संकेत है कि सरकार आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीरता से ध्यान दे रही है।
यदि सभी विभाग RPwD Act, 2016 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करते हैं और लंबित बैकलॉग रिक्तियों को समय पर भरते हैं, तो लाखों दिव्यांग युवाओं को सरकारी सेवाओं में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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